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| Article Name : | | | कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में हिंदी साहित्य: सृजनात्मकता, लेखकत्व और साहित्यिक प्रामाणिकता का पुनर्विचार | | Author Name : | | | Dr. A. V. Nandaniya | | Publisher : | | | Ashok Yakkaldevi | | Article Series No. : | | | ROR-17081 | | Article : | |  | Author Profile | | Abstract : | | | मनुष्य ने जब पहली बार अपने अनुभवों को भाषा में व्यक्त किया होगा, तभी से साहित्य की यात्रा आरंभ हुई होगी। शब्दों के माध्यम से अनुभव को स्मृति में सुरक्षित करना, भावनाओं को अभिव्यक्ति देना, कल्पना को आकार देना और अपने समय के सामाजिक-सांस्कृतिक यथार्थ को दर्ज करना साहित्य की मूल प्रवृत्तियों में रहा है। | | Keywords : | | |
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