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| Article Name : | | | विकास, विस्थापन और पर्यावरणीय न्याय: समकालीन हिंदी साहित्य का पारिस्थितिक पुनर्पाठ | | Author Name : | | | Dr. A. V. Nandaniya | | Publisher : | | | Ashok Yakkaldevi | | Article Series No. : | | | ROR-17080 | | Article : | |  | Author Profile | | Abstract : | | | विकास आधुनिक समाज की सबसे प्रभावशाली अवधारणाओं में से एक है। औद्योगीकरण, शहरीकरण, बड़े बाँध, खनन, राजमार्ग, विद्युत परियोजनाएँ और तकनीकी विस्तार आधुनिक राष्ट्र-निर्माण तथा आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण संकेतक माने गए हैं। | | Keywords : | | - विकास, विस्थापन और पर्यावरणीय न्याय,समकालीन हिंदी साहित्य,
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